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एनसीईआरटी ने माफी मांगी
न्यायपालिका भ्रष्टाचार अध्याय विवाद पर एनसीईआरटी ने सुप्रीम कोर्ट में माफी मांगी
न्यायपालिका में भ्रष्टाचार अध्याय विवाद पर एनसीईआरटी ने मांगी माफी, सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई
26 Feb 2026, 09:27 AM
Delhi
-
New Delhi
Reporter :
Mahesh Sharma
New Delhi
स्कूल पाठ्यक्रम में न्यायपालिका से जुड़े एक विवादित अध्याय को लेकर मचे विवाद के बीच National Council of Educational Research and Training ने माफी मांग ली है। यह मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of India में विचाराधीन है, जहां मुख्य न्यायाधीश की पीठ आज इस विषय पर सुनवाई करने वाली है।
एनसीईआरटी द्वारा तैयार किए गए पाठ्यक्रम में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” विषय से जुड़ा एक अध्याय शामिल किया गया था। इस अध्याय में न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही के संदर्भ में कुछ उदाहरण दिए गए थे। हालांकि अध्याय में की गई टिप्पणियों और संदर्भों को लेकर विवाद खड़ा हो गया और कई पक्षों ने इसे न्यायपालिका की छवि को प्रभावित करने वाला बताया।
विवाद बढ़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया। इसके बाद सरकार भी सक्रिय हुई और संबंधित अध्याय की सामग्री पर आपत्ति जताई गई। सूत्रों के अनुसार सरकार का मानना था कि न्यायपालिका जैसे संवैधानिक संस्थान के बारे में इस प्रकार की प्रस्तुति से छात्रों के बीच गलत संदेश जा सकता है।
बताया जा रहा है कि पाठ्यक्रम में न्यायपालिका से जुड़े उदाहरणों में न्यायाधीश B. R. Gavai का उल्लेख भी किया गया था, जिस पर भी आपत्ति जताई गई। सरकार के सूत्रों का कहना था कि किसी व्यक्तिगत संदर्भ को शामिल करना उचित नहीं है और इससे न्यायपालिका की गरिमा प्रभावित हो सकती है।
एनसीईआरटी ने अदालत में अपनी ओर से स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि किसी संस्था या व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाने का उसका कोई इरादा नहीं था। परिषद ने यह भी संकेत दिए हैं कि विवादित सामग्री में संशोधन किया जा सकता है या उसे हटाया भी जा सकता है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाठ्यक्रम तैयार करते समय संवेदनशील विषयों को संतुलित तरीके से प्रस्तुत करना आवश्यक होता है, ताकि छात्रों को सही जानकारी मिले और संस्थाओं के प्रति सम्मान भी बना रहे।
अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी है। अदालत के निर्देश के बाद यह तय होगा कि विवादित अध्याय को पूरी तरह हटाया जाएगा या उसमें बदलाव किए जाएंगे। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसका असर भविष्य के शैक्षणिक पाठ्यक्रमों की दिशा तय करने पर पड़ सकता है।
एनसीईआरटी द्वारा तैयार किए गए पाठ्यक्रम में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” विषय से जुड़ा एक अध्याय शामिल किया गया था। इस अध्याय में न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही के संदर्भ में कुछ उदाहरण दिए गए थे। हालांकि अध्याय में की गई टिप्पणियों और संदर्भों को लेकर विवाद खड़ा हो गया और कई पक्षों ने इसे न्यायपालिका की छवि को प्रभावित करने वाला बताया।
विवाद बढ़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया। इसके बाद सरकार भी सक्रिय हुई और संबंधित अध्याय की सामग्री पर आपत्ति जताई गई। सूत्रों के अनुसार सरकार का मानना था कि न्यायपालिका जैसे संवैधानिक संस्थान के बारे में इस प्रकार की प्रस्तुति से छात्रों के बीच गलत संदेश जा सकता है।
बताया जा रहा है कि पाठ्यक्रम में न्यायपालिका से जुड़े उदाहरणों में न्यायाधीश B. R. Gavai का उल्लेख भी किया गया था, जिस पर भी आपत्ति जताई गई। सरकार के सूत्रों का कहना था कि किसी व्यक्तिगत संदर्भ को शामिल करना उचित नहीं है और इससे न्यायपालिका की गरिमा प्रभावित हो सकती है।
एनसीईआरटी ने अदालत में अपनी ओर से स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि किसी संस्था या व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचाने का उसका कोई इरादा नहीं था। परिषद ने यह भी संकेत दिए हैं कि विवादित सामग्री में संशोधन किया जा सकता है या उसे हटाया भी जा सकता है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाठ्यक्रम तैयार करते समय संवेदनशील विषयों को संतुलित तरीके से प्रस्तुत करना आवश्यक होता है, ताकि छात्रों को सही जानकारी मिले और संस्थाओं के प्रति सम्मान भी बना रहे।
अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी है। अदालत के निर्देश के बाद यह तय होगा कि विवादित अध्याय को पूरी तरह हटाया जाएगा या उसमें बदलाव किए जाएंगे। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसका असर भविष्य के शैक्षणिक पाठ्यक्रमों की दिशा तय करने पर पड़ सकता है।
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