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आवारा पशु हटाने योजना
विधानसभा में आवारा पशुओं पर चर्चा हुई गंभीरता से
दो वर्षों में सड़कों से हटेंगे आवारा पशु, विधानसभा में सरकार ने दिया बड़ा भरोसा
26 Feb 2026, 12:17 PM
Madhya Pradesh
-
Bhopal
Reporter :
Mahesh Sharma
Bhopal
मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आवारा मवेशियों की समस्या प्रमुख मुद्दा बनकर सामने आई। इस दौरान सरकार ने दावा किया कि अगले दो वर्षों में राज्य की सड़कों पर आवारा पशु दिखाई नहीं देंगे। सरकार का कहना है कि नई योजनाओं और व्यवस्थाओं के माध्यम से इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा।
विधानसभा में इस विषय को विपक्षी विधायकों ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य के कई जिलों में आवारा मवेशियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों और आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विपक्ष का आरोप था कि पशुओं के कारण सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं और फसलों को भी नुकसान हो रहा है।
सरकार की ओर से जवाब देते हुए संबंधित मंत्री ने कहा कि आवारा पशुओं की समस्या को गंभीरता से लिया जा रहा है और इसे खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में नई गौशालाओं और पशु आश्रय स्थलों का निर्माण किया जा रहा है, जहां बेसहारा पशुओं को रखा जाएगा।
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025 के दौरान शहरी निकायों ने लगभग 78 हजार से अधिक आवारा पशुओं को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर भेजा है। इसके साथ ही पशु मालिकों पर लापरवाही के कारण जुर्माना भी लगाया गया है। सरकार का कहना है कि भविष्य में इस कार्रवाई को और तेज किया जाएगा ताकि पशुओं को सड़कों पर भटकने से रोका जा सके।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि नगर निकायों और पंचायतों को इस दिशा में विशेष जिम्मेदारी दी गई है। स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि आवारा पशुओं की पहचान कर उन्हें आश्रय स्थलों तक पहुंचाया जाए। साथ ही पशु मालिकों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गौशालाओं का निर्माण समय पर पूरा हो गया और प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत रही, तो आवारा पशुओं की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि इतनी बड़ी समस्या का पूरी तरह समाधान करना आसान नहीं होगा।
सरकार का दावा है कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से आने वाले दो वर्षों में स्थिति में बड़ा सुधार दिखाई देगा। यदि यह योजना सफल रही तो राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा और कृषि दोनों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
विधानसभा में दिए गए इस आश्वासन के बाद अब लोगों की नजर सरकार की आगामी कार्रवाई और योजनाओं के क्रियान्वयन पर टिकी हुई है।
विधानसभा में इस विषय को विपक्षी विधायकों ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य के कई जिलों में आवारा मवेशियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों और आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। विपक्ष का आरोप था कि पशुओं के कारण सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं और फसलों को भी नुकसान हो रहा है।
सरकार की ओर से जवाब देते हुए संबंधित मंत्री ने कहा कि आवारा पशुओं की समस्या को गंभीरता से लिया जा रहा है और इसे खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में नई गौशालाओं और पशु आश्रय स्थलों का निर्माण किया जा रहा है, जहां बेसहारा पशुओं को रखा जाएगा।
मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025 के दौरान शहरी निकायों ने लगभग 78 हजार से अधिक आवारा पशुओं को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर भेजा है। इसके साथ ही पशु मालिकों पर लापरवाही के कारण जुर्माना भी लगाया गया है। सरकार का कहना है कि भविष्य में इस कार्रवाई को और तेज किया जाएगा ताकि पशुओं को सड़कों पर भटकने से रोका जा सके।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि नगर निकायों और पंचायतों को इस दिशा में विशेष जिम्मेदारी दी गई है। स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि आवारा पशुओं की पहचान कर उन्हें आश्रय स्थलों तक पहुंचाया जाए। साथ ही पशु मालिकों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गौशालाओं का निर्माण समय पर पूरा हो गया और प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत रही, तो आवारा पशुओं की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि इतनी बड़ी समस्या का पूरी तरह समाधान करना आसान नहीं होगा।
सरकार का दावा है कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से आने वाले दो वर्षों में स्थिति में बड़ा सुधार दिखाई देगा। यदि यह योजना सफल रही तो राज्य के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा और कृषि दोनों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
विधानसभा में दिए गए इस आश्वासन के बाद अब लोगों की नजर सरकार की आगामी कार्रवाई और योजनाओं के क्रियान्वयन पर टिकी हुई है।
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