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NCERT किताब विवाद
कई स्तर की समीक्षा के बाद पुस्तक छपती है
NCERT किताबों में बदलाव कैसे तय होता है, अंतिम फैसला कौन करता है, जानें
26 Feb 2026, 03:52 PM
Delhi
-
New Delhi
Reporter :
Mahesh Sharma
New Delhi
नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) की किताबों में किए जाने वाले बदलावों को लेकर हाल ही में चर्चा छिड़ गई है। विशेष रूप से आठवीं कक्षा की किताबों के एक अध्याय को लेकर विवाद पैदा हुआ, जिससे यह सवाल उठने लगा कि आखिर NCERT किताबों में क्या लिखा जाएगा और अंतिम निर्णय कौन करता है।
किसी भी NCERT किताब का अध्याय लिखने की प्रक्रिया National Curriculum Framework (NCF) से शुरू होती है। NCF यह तय करता है कि किताबों में कौन-सा कंटेंट, किस स्तर और किस दृष्टिकोण से शामिल किया जाएगा। इसके बाद विषय विशेषज्ञ और अनुभवी लेखक उस फ्रेमवर्क के आधार पर अध्याय तैयार करते हैं।
लेखन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अध्याय इंटरनल एकेडमिक रिव्यू और एक्सटर्नल रिव्यू की कई परतों से गुजरता है। इंटरनल रिव्यू में NCERT की एकेडमिक टीम जांच करती है कि कंटेंट शैक्षणिक रूप से उपयुक्त है या नहीं। इसके बाद बाहरी विशेषज्ञ और अन्य शिक्षाविद समीक्षा करते हैं ताकि अध्याय की गुणवत्ता और तथ्यात्मक सटीकता सुनिश्चित हो सके।
प्रकाशन से पहले, तैयार अध्याय को संस्थागत अनुमोदन मिलता है। इसमें NCERT की बोर्ड मीटिंग में चर्चा की जाती है और आवश्यक सुधार सुझाए जाते हैं। इसके बाद किताबें प्रिंट के लिए भेजी जाती हैं।
हालांकि, प्रिंट होने के बाद भी अगर किसी अध्याय पर गंभीर आपत्तियां आती हैं, तो NCERT तय सिस्टम के तहत बदलाव कर सकता है। इसमें सरकार और न्यायिक संस्थाएं भी शामिल हो सकती हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय पर NCERT और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था, जिसमें यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया कि आपत्तियों को गंभीरता से लिया जाए और अंतिम निर्णय उचित हो।
सरकार की मंजूरी भी आवश्यक होती है, खासकर जब किसी अध्याय के सामाजिक या संवेदनशील पहलुओं को लेकर बहस हो। इस प्रक्रिया में लेखक, एकेडमिक टीम और नीति निर्माता मिलकर तय करते हैं कि पाठ्यपुस्तक का अंतिम संस्करण क्या होगा।
इस पूरी प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होता है कि NCERT की किताबें शैक्षणिक रूप से मजबूत हों और सामाजिक, ऐतिहासिक तथा वैज्ञानिक दृष्टि से संतुलित जानकारी प्रदान करें। विवादित अध्यायों पर प्रिंट के बाद भी बदलाव की संभावना, पाठकों और नीति निर्माताओं दोनों के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करती है।
कुल मिलाकर, NCERT किताबों में क्या लिखा जाएगा, यह केवल लेखक का फैसला नहीं है, बल्कि कई स्तर की समीक्षा, सरकार की मंजूरी और आपत्तियों पर विचार के बाद अंतिम रूप दिया जाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य भारतीय विद्यार्थियों को सही, सटीक और संतुलित शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराना है।
किसी भी NCERT किताब का अध्याय लिखने की प्रक्रिया National Curriculum Framework (NCF) से शुरू होती है। NCF यह तय करता है कि किताबों में कौन-सा कंटेंट, किस स्तर और किस दृष्टिकोण से शामिल किया जाएगा। इसके बाद विषय विशेषज्ञ और अनुभवी लेखक उस फ्रेमवर्क के आधार पर अध्याय तैयार करते हैं।
लेखन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अध्याय इंटरनल एकेडमिक रिव्यू और एक्सटर्नल रिव्यू की कई परतों से गुजरता है। इंटरनल रिव्यू में NCERT की एकेडमिक टीम जांच करती है कि कंटेंट शैक्षणिक रूप से उपयुक्त है या नहीं। इसके बाद बाहरी विशेषज्ञ और अन्य शिक्षाविद समीक्षा करते हैं ताकि अध्याय की गुणवत्ता और तथ्यात्मक सटीकता सुनिश्चित हो सके।
प्रकाशन से पहले, तैयार अध्याय को संस्थागत अनुमोदन मिलता है। इसमें NCERT की बोर्ड मीटिंग में चर्चा की जाती है और आवश्यक सुधार सुझाए जाते हैं। इसके बाद किताबें प्रिंट के लिए भेजी जाती हैं।
हालांकि, प्रिंट होने के बाद भी अगर किसी अध्याय पर गंभीर आपत्तियां आती हैं, तो NCERT तय सिस्टम के तहत बदलाव कर सकता है। इसमें सरकार और न्यायिक संस्थाएं भी शामिल हो सकती हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस विषय पर NCERT और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था, जिसमें यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया कि आपत्तियों को गंभीरता से लिया जाए और अंतिम निर्णय उचित हो।
सरकार की मंजूरी भी आवश्यक होती है, खासकर जब किसी अध्याय के सामाजिक या संवेदनशील पहलुओं को लेकर बहस हो। इस प्रक्रिया में लेखक, एकेडमिक टीम और नीति निर्माता मिलकर तय करते हैं कि पाठ्यपुस्तक का अंतिम संस्करण क्या होगा।
इस पूरी प्रक्रिया से यह सुनिश्चित होता है कि NCERT की किताबें शैक्षणिक रूप से मजबूत हों और सामाजिक, ऐतिहासिक तथा वैज्ञानिक दृष्टि से संतुलित जानकारी प्रदान करें। विवादित अध्यायों पर प्रिंट के बाद भी बदलाव की संभावना, पाठकों और नीति निर्माताओं दोनों के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करती है।
कुल मिलाकर, NCERT किताबों में क्या लिखा जाएगा, यह केवल लेखक का फैसला नहीं है, बल्कि कई स्तर की समीक्षा, सरकार की मंजूरी और आपत्तियों पर विचार के बाद अंतिम रूप दिया जाता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य भारतीय विद्यार्थियों को सही, सटीक और संतुलित शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराना है।
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