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किताब विवाद पर कोर्ट सख्त
किताब विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने जिम्मेदारों के नाम मांगे
एनसीईआरटी किताब विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, जिम्मेदारों के नाम मांगे और जांच जारी रखने के संकेत
26 Feb 2026, 01:28 PM
Delhi
-
New Delhi
Reporter :
Mahesh Sharma
New Delhi
आठवीं कक्षा की एनसीईआरटी पुस्तक में न्यायपालिका से जुड़े विवादित अध्याय को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि मामले को केवल माफी के आधार पर बंद नहीं किया जाएगा और इसमें शामिल जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान जरूरी है। अदालत ने कहा कि यह गंभीर विषय है और इसकी गहन जांच आवश्यक है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि विवादित सामग्री तैयार करने में किन लोगों की भूमिका रही। न्यायालय ने साफ कहा कि संबंधित व्यक्तियों के नाम बताए जाएं ताकि उचित कार्रवाई की जा सके। अदालत ने यह भी कहा कि न्यायपालिका जैसे संवेदनशील संस्थान के बारे में गलत या भ्रामक जानकारी देना स्वीकार्य नहीं है।
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि संबंधित अध्याय तैयार करने वाले दो व्यक्तियों को भविष्य में मंत्रालय से नहीं जोड़ा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित संस्था ने बिना किसी शर्त के माफी मांग ली है और विवादित सामग्री को उचित नहीं ठहराया जा सकता। सरकार ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी।
इसके बावजूद अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल माफी से मामला समाप्त नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने कहा कि यह तय करना अभी बाकी है कि माफी स्वीकार की जाए या नहीं। अदालत का कहना था कि मामले में न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी है ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि विवादित सामग्री की डिजिटल प्रतियां बड़ी संख्या में प्रसारित हो चुकी हैं। इस पर अदालत ने चिंता जताई और कहा कि ऑनलाइन प्रसार के कारण इस विषय की गंभीरता और बढ़ जाती है। न्यायालय ने संकेत दिए कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जाएगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला शिक्षा सामग्री की गुणवत्ता और जिम्मेदारी से जुड़ा हुआ है। पाठ्यपुस्तकों में शामिल विषयों का प्रभाव छात्रों की सोच पर पड़ता है, इसलिए तथ्यों की सटीकता और संतुलन जरूरी है।
अदालत ने फिलहाल मामले की सुनवाई जारी रखने का निर्णय लिया है और अगली तारीख पर विस्तृत जानकारी पेश करने को कहा है। इस मामले पर देशभर में चर्चा हो रही है और शिक्षा जगत के विशेषज्ञ भी पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
यह मामला अब केवल एक अध्याय तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और संस्थागत विश्वसनीयता से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार से पूछा कि विवादित सामग्री तैयार करने में किन लोगों की भूमिका रही। न्यायालय ने साफ कहा कि संबंधित व्यक्तियों के नाम बताए जाएं ताकि उचित कार्रवाई की जा सके। अदालत ने यह भी कहा कि न्यायपालिका जैसे संवेदनशील संस्थान के बारे में गलत या भ्रामक जानकारी देना स्वीकार्य नहीं है।
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि संबंधित अध्याय तैयार करने वाले दो व्यक्तियों को भविष्य में मंत्रालय से नहीं जोड़ा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित संस्था ने बिना किसी शर्त के माफी मांग ली है और विवादित सामग्री को उचित नहीं ठहराया जा सकता। सरकार ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी।
इसके बावजूद अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल माफी से मामला समाप्त नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने कहा कि यह तय करना अभी बाकी है कि माफी स्वीकार की जाए या नहीं। अदालत का कहना था कि मामले में न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी है ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि विवादित सामग्री की डिजिटल प्रतियां बड़ी संख्या में प्रसारित हो चुकी हैं। इस पर अदालत ने चिंता जताई और कहा कि ऑनलाइन प्रसार के कारण इस विषय की गंभीरता और बढ़ जाती है। न्यायालय ने संकेत दिए कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जाएगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला शिक्षा सामग्री की गुणवत्ता और जिम्मेदारी से जुड़ा हुआ है। पाठ्यपुस्तकों में शामिल विषयों का प्रभाव छात्रों की सोच पर पड़ता है, इसलिए तथ्यों की सटीकता और संतुलन जरूरी है।
अदालत ने फिलहाल मामले की सुनवाई जारी रखने का निर्णय लिया है और अगली तारीख पर विस्तृत जानकारी पेश करने को कहा है। इस मामले पर देशभर में चर्चा हो रही है और शिक्षा जगत के विशेषज्ञ भी पाठ्यपुस्तकों की समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
यह मामला अब केवल एक अध्याय तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और संस्थागत विश्वसनीयता से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।
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