Search News
Tip: Search by heading, content, category, city, state, highlights.
- Select Location
- ताज़ा खबर
- राष्ट्रीय (भारत)
- अंतरराष्ट्रीय
- राज्य व क्षेत्रीय
- राजनीति
- सरकार व प्रशासन
- नीति व नियम
- न्यायालय व न्यायपालिका
- कानून व्यवस्था
- अपराध
- साइबर अपराध व डिजिटल सुरक्षा
- रक्षा
- सुरक्षा व आतंकवाद
- अर्थव्यवस्था (मैक्रो)
- व्यापार व कॉरपोरेट
- बैंकिंग व भुगतान
- स्टार्टअप व उद्यमिता
- टेक्नोलॉजी
- विज्ञान व अनुसंधान
- पर्यावरण
- मौसम
- आपदा व आपातकाल
- स्वास्थ्य
- फिटनेस व वेलनेस
- शिक्षा
- नौकरी व करियर
- कृषि
- ग्रामीण विकास
- परिवहन
- दुर्घटना व सुरक्षा
- ऑटोमोबाइल व ईवी
- खेल
- मनोरंजन
- धर्म व अध्यात्म
- समाज व सामाजिक मुद्दे
- लाइफस्टाइल
- यात्रा व पर्यटन
- जन सेवा व अलर्ट
- जांच व विशेष रिपोर्ट
- प्रतियोगी परीक्षाएँ
- खेल (अन्य)
Choose Location
Current:
India
Country: India
Selected State: None
किताब पर कोर्ट सख्त
पाठ्यपुस्तक में विवादित सामग्री पर कोर्ट ने सुनवाई की
पाठ्यपुस्तक विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, न्यायपालिका पर टिप्पणी को लेकर जवाबदेही तय होगी
26 Feb 2026, 11:38 AM
Delhi
-
New Delhi
Reporter :
Mahesh Sharma
New Delhi
स्कूली पाठ्यपुस्तक में न्यायपालिका से जुड़े विवादित विषय को शामिल किए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की और संबंधित सामग्री को लेकर गंभीर चिंता जताई। न्यायपालिका पर की गई टिप्पणी को लेकर अदालत ने स्पष्ट किया कि शिक्षा के माध्यम से गलत संदेश नहीं जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि छात्रों को पढ़ाई के जरिए न्यायपालिका की छवि पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाली बातें नहीं सिखाई जानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी सामग्री पाठ्यपुस्तक में शामिल करने की अनुमति कैसे दी गई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। अदालत ने इस पूरे मामले में जवाबदेही तय करने पर जोर दिया।
अदालत ने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था में तथ्यों की सही प्रस्तुति आवश्यक है और किसी भी संस्था की छवि को बिना उचित आधार के प्रभावित करना उचित नहीं माना जा सकता। न्यायपालिका को लेकर छात्रों के बीच गलत धारणा बनने से रोकने की आवश्यकता बताई गई।
सरकार की ओर से पेश पक्ष में बताया गया कि विवादित सामग्री को लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। संबंधित अध्याय को तैयार करने वाले व्यक्तियों को भविष्य में किसी भी शैक्षणिक सामग्री से जुड़े कार्यों में शामिल नहीं करने का आश्वासन दिया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि डिजिटल माध्यमों में मौजूद विवादित सामग्री को हटाने की प्रक्रिया जारी है।
अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि ऑनलाइन और अन्य माध्यमों में उपलब्ध सामग्री को हटाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। इसके अलावा यह सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो।
इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा जगत और कानूनी क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूली पुस्तकों में शामिल विषयों की समीक्षा और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिक्षा प्रणाली में जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखना जरूरी है। अदालत के निर्देशों के बाद संबंधित एजेंसियों द्वारा आवश्यक कार्रवाई किए जाने की उम्मीद है। इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान और तथ्य सामने आ सकते हैं।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि छात्रों को पढ़ाई के जरिए न्यायपालिका की छवि पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाली बातें नहीं सिखाई जानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी सामग्री पाठ्यपुस्तक में शामिल करने की अनुमति कैसे दी गई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। अदालत ने इस पूरे मामले में जवाबदेही तय करने पर जोर दिया।
अदालत ने यह भी कहा कि शिक्षा व्यवस्था में तथ्यों की सही प्रस्तुति आवश्यक है और किसी भी संस्था की छवि को बिना उचित आधार के प्रभावित करना उचित नहीं माना जा सकता। न्यायपालिका को लेकर छात्रों के बीच गलत धारणा बनने से रोकने की आवश्यकता बताई गई।
सरकार की ओर से पेश पक्ष में बताया गया कि विवादित सामग्री को लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। संबंधित अध्याय को तैयार करने वाले व्यक्तियों को भविष्य में किसी भी शैक्षणिक सामग्री से जुड़े कार्यों में शामिल नहीं करने का आश्वासन दिया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि डिजिटल माध्यमों में मौजूद विवादित सामग्री को हटाने की प्रक्रिया जारी है।
अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि ऑनलाइन और अन्य माध्यमों में उपलब्ध सामग्री को हटाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। इसके अलावा यह सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो।
इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा जगत और कानूनी क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूली पुस्तकों में शामिल विषयों की समीक्षा और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिक्षा प्रणाली में जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखना जरूरी है। अदालत के निर्देशों के बाद संबंधित एजेंसियों द्वारा आवश्यक कार्रवाई किए जाने की उम्मीद है। इस मामले में आगे की सुनवाई के दौरान और तथ्य सामने आ सकते हैं।
ADVERTISEMENT
Sponsored
Ad
Open
More News
पूर्व मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम ने डीएमके का दामन थामा, चुनाव से पहले सियासत गरमाई तमिलनाडु में
February 27, 2026
दिल्ली में आयुष्मान योजना का विस्तार, दिव्यांग और जरूरतमंद परिवारों को मिलेगा मुफ्त इलाज लाभ
February 27, 2026
बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी पर सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में कटौती करेगा तेलंगाना प्रशासन जल्द
February 27, 2026
पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर हिंसक संघर्ष तेज, हवाई हमलों और जवाबी कार्रवाई से हालात गंभीर बने
February 27, 2026
अग्रिम जमानत पर फैसला अहम, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई आज
February 27, 2026
अफगान संघर्ष के बीच पाकिस्तानी लड़ाकू विमान गिराने के दावों पर सोशल मीडिया में चर्चा तेज
February 27, 2026
अफगानिस्तान को कड़ी चेतावनी पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संघर्ष तेज होने संकेत दिए
February 27, 2026
संभल में रंग एकादशी जुलूस और जुम्मे नमाज को लेकर प्रशासन ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की
February 27, 2026
संजू सैमसन की बल्लेबाजी पर उठे सवाल, गावस्कर ने लगातार एक जैसी गलती बताई वजह
February 27, 2026
लखनऊ में खाद्य विभाग की बड़ी छापेमारी, नकली मसाले और खोया जब्त कर कार्रवाई
February 27, 2026
ADVERTISEMENT
Sponsored
Open
Loading more…