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बटुकों की पहचान उजागर
केस संख्या 125/2026 के तहत सुनवाई शुरू
शंकराचार्य ने POSCO केस में उठाया बटुकों की पहचान उजागर होने पर सवाल
26 Feb 2026, 03:28 PM
Uttar Pradesh
-
Prayagraj (Allahabad)
Reporter :
Mahesh Sharma
Prayagraj (Allahabad)
प्रयागराज के झूंसी थाना क्षेत्र में दर्ज पॉक्सो प्रकरण में नया मोड़ आया है। इस मामले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पॉक्सो एक्ट की धारा 22 और 23 के तहत अदालत में याचिका दाखिल की है। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्यों बटुक पीड़ितों की पहचान उजागर की गई, जबकि कानून इसके खिलाफ स्पष्ट प्रावधान करता है।
केस संख्या 125/2026 के तहत यह मामला पॉक्सो कोर्ट में सुना जा रहा है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की याचिका में कहा गया है कि नाबालिग पीड़ितों की पहचान सार्वजनिक करना कानून के खिलाफ है और इससे उनकी मानसिक स्थिति और सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अदालत ने जवाब के लिए समय मांगा है, जिससे पक्षकार अपनी दलील प्रस्तुत कर सकें।
इस केस में शामिल पीड़ित बटुकों की मेडिकल रिपोर्ट भी सामने आ चुकी है। रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न की पुष्टि की गई है और इसे गंभीर मामला बताया गया है। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मामले की नियमित सुनवाई की आवश्यकता बताई है।
अधिवक्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने याचिकाकर्ता के लिए जवाब पेश करने के लिए समय मांगा है। यह कदम मामले की प्रक्रिया में निष्पक्षता और पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पॉक्सो एक्ट की धारा 22 और 23 में स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी नाबालिग पीड़ित की पहचान सार्वजनिक नहीं की जा सकती। यह मामला इस कानून के पालन और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर चर्चा में है।
प्रयागराज में यह मामला समाज में बाल सुरक्षा और कानून की प्रासंगिकता को लेकर नए सवाल खड़े कर रहा है। साथ ही, यह भी स्पष्ट हो रहा है कि कानूनी प्रक्रिया में ध्यान देने की आवश्यकता है कि नाबालिग पीड़ितों को न्याय पाने के दौरान किसी तरह की हानि न पहुंचे।
कुल मिलाकर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा दर्ज याचिका ने पॉक्सो प्रकरण में एक नया मोड़ दिया है। अदालत की सुनवाई और मेडिकल रिपोर्ट ने मामले की गंभीरता को स्पष्ट किया है। आगामी सुनवाई में अदालत के फैसले से नाबालिग पीड़ितों की सुरक्षा और कानून के पालन का दिशा-निर्देश तय होगा।
केस संख्या 125/2026 के तहत यह मामला पॉक्सो कोर्ट में सुना जा रहा है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की याचिका में कहा गया है कि नाबालिग पीड़ितों की पहचान सार्वजनिक करना कानून के खिलाफ है और इससे उनकी मानसिक स्थिति और सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। अदालत ने जवाब के लिए समय मांगा है, जिससे पक्षकार अपनी दलील प्रस्तुत कर सकें।
इस केस में शामिल पीड़ित बटुकों की मेडिकल रिपोर्ट भी सामने आ चुकी है। रिपोर्ट में यौन उत्पीड़न की पुष्टि की गई है और इसे गंभीर मामला बताया गया है। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए मामले की नियमित सुनवाई की आवश्यकता बताई है।
अधिवक्ता आशुतोष ब्रह्मचारी ने याचिकाकर्ता के लिए जवाब पेश करने के लिए समय मांगा है। यह कदम मामले की प्रक्रिया में निष्पक्षता और पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पॉक्सो एक्ट की धारा 22 और 23 में स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी नाबालिग पीड़ित की पहचान सार्वजनिक नहीं की जा सकती। यह मामला इस कानून के पालन और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर चर्चा में है।
प्रयागराज में यह मामला समाज में बाल सुरक्षा और कानून की प्रासंगिकता को लेकर नए सवाल खड़े कर रहा है। साथ ही, यह भी स्पष्ट हो रहा है कि कानूनी प्रक्रिया में ध्यान देने की आवश्यकता है कि नाबालिग पीड़ितों को न्याय पाने के दौरान किसी तरह की हानि न पहुंचे।
कुल मिलाकर, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा दर्ज याचिका ने पॉक्सो प्रकरण में एक नया मोड़ दिया है। अदालत की सुनवाई और मेडिकल रिपोर्ट ने मामले की गंभीरता को स्पष्ट किया है। आगामी सुनवाई में अदालत के फैसले से नाबालिग पीड़ितों की सुरक्षा और कानून के पालन का दिशा-निर्देश तय होगा।
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