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वीडियो कॉल से डिजिटल गिरफ्तारी
साइबर ठगों ने 25 दिन डॉक्टर को डिजिटल गिरफ्तारी में रखा
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 90 वर्षीय डॉक्टर से साइबर ठगों ने ठगे ढाई करोड़ रुपये
25 Feb 2026, 11:51 AM
Madhya Pradesh
-
Gwalior
Reporter :
Mahesh Sharma
Gwalior
मध्य प्रदेश के ग्वालियर में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 90 वर्षीय रिटायर्ड एयर फोर्स डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगों ने करीब ढाई करोड़ रुपये की चपत लगा दी। ठगों ने खुद को सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर बुजुर्ग डॉक्टर को लगभग 25 दिनों तक मानसिक दबाव में रखा और धीरे-धीरे बड़ी रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा ली।
जानकारी के अनुसार, डॉक्टर को जनवरी महीने में एक फोन कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की जांच चल रही है। ठगों ने गिरफ्तारी से बचने और जांच में सहयोग के नाम पर डॉक्टर को लगातार वीडियो कॉल पर बने रहने के लिए मजबूर किया। इस दौरान उन्हें किसी से संपर्क न करने और निर्देशों का पालन करने को कहा गया।
ठगों ने डॉक्टर को यह विश्वास दिलाया कि वे "ऑनलाइन निगरानी" या डिजिटल अरेस्ट की प्रक्रिया में हैं और अगर उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा। डर और भ्रम की स्थिति में डॉक्टर ने कई बार अलग-अलग खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी। इस पूरी अवधि में ठग डॉक्टर से लगातार संपर्क बनाए रहे और उन्हें मानसिक रूप से भयभीत करते रहे।
मामले का खुलासा तब हुआ जब बैंक अधिकारियों ने डॉक्टर के खाते से हो रहे असामान्य और बड़े लेनदेन को संदिग्ध मानते हुए उनसे संपर्क किया। बैंक मैनेजर ने जब लेनदेन के बारे में जानकारी ली तो डॉक्टर को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ठगों ने बेहद सुनियोजित तरीके से इस वारदात को अंजाम दिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कॉल करने वाले अलग-अलग एजेंसियों के नाम लेकर डॉक्टर को डराते रहे। पुलिस अब बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के जरिए आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
पुलिस ने लोगों को चेतावनी दी है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तारी या जांच की प्रक्रिया नहीं चलाती है। ऐसे मामलों में तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए।
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि साइबर अपराधी अब नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं, खासकर बुजुर्गों को। पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने और अनजान कॉल्स पर व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी साझा न करने की अपील की है।
जानकारी के अनुसार, डॉक्टर को जनवरी महीने में एक फोन कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की जांच चल रही है। ठगों ने गिरफ्तारी से बचने और जांच में सहयोग के नाम पर डॉक्टर को लगातार वीडियो कॉल पर बने रहने के लिए मजबूर किया। इस दौरान उन्हें किसी से संपर्क न करने और निर्देशों का पालन करने को कहा गया।
ठगों ने डॉक्टर को यह विश्वास दिलाया कि वे "ऑनलाइन निगरानी" या डिजिटल अरेस्ट की प्रक्रिया में हैं और अगर उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा। डर और भ्रम की स्थिति में डॉक्टर ने कई बार अलग-अलग खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी। इस पूरी अवधि में ठग डॉक्टर से लगातार संपर्क बनाए रहे और उन्हें मानसिक रूप से भयभीत करते रहे।
मामले का खुलासा तब हुआ जब बैंक अधिकारियों ने डॉक्टर के खाते से हो रहे असामान्य और बड़े लेनदेन को संदिग्ध मानते हुए उनसे संपर्क किया। बैंक मैनेजर ने जब लेनदेन के बारे में जानकारी ली तो डॉक्टर को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ठगों ने बेहद सुनियोजित तरीके से इस वारदात को अंजाम दिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कॉल करने वाले अलग-अलग एजेंसियों के नाम लेकर डॉक्टर को डराते रहे। पुलिस अब बैंक खातों और मोबाइल नंबरों के जरिए आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।
पुलिस ने लोगों को चेतावनी दी है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तारी या जांच की प्रक्रिया नहीं चलाती है। ऐसे मामलों में तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए।
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि साइबर अपराधी अब नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बना रहे हैं, खासकर बुजुर्गों को। पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने और अनजान कॉल्स पर व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी साझा न करने की अपील की है।
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