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अशांत क्षेत्र घोषित संभव
राजस्थान सरकार ने डिस्टर्ब्ड एरिया बिल 2026 पेश किया
राजस्थान का ‘डिस्टर्ब्ड एरिया बिल 2026’ विवादित जमावड़े रोकने और पलायन रोकने का प्रयास
26 Feb 2026, 03:21 PM
Rajasthan
-
Jaipur
Reporter :
Mahesh Sharma
Jaipur
राजस्थान सरकार ने राज्य में जमीनों के अनुचित अधिग्रहण और सांप्रदायिक तनाव को रोकने के लिए ‘डिस्टर्ब्ड एरिया बिल 2026’ पेश किया है। इस बिल के लागू होने के बाद किसी भी इलाके को प्रशासनिक निर्णय से अशांत क्षेत्र घोषित किया जा सकता है। इसका मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों में अनुचित जमावड़े या किसी समुदाय के अत्यधिक प्रभुत्व को रोकना है, जिससे भविष्य में विवाद और पलायन जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।
बिल के तहत, यदि किसी इलाके में एक समुदाय के लोगों का अनुचित जमावड़ा हो या होने की संभावना हो, तो प्रशासन उस इलाके को ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित कर सकता है। ऐसा घोषित किए जाने के बाद किसी भी प्रकार की जमीनों या संपत्ति की बिक्री और खरीद पर नियंत्रण रहेगा। यह कदम गुजरात के समान कानूनों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
कानून तोड़ने पर सख्त सजा का प्रावधान भी किया गया है। इसके अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने पर 3 से 5 साल की जेल की सजा और जुर्माना लगाया जा सकता है। यह प्रावधान प्रशासन को अधिकार देता है कि वह किसी भी अनुचित भूमि हस्तांतरण को तुरंत रोक सके और कानून तोड़ने वालों को दंडित कर सके।
राजनीतिक रूप से यह बिल राजस्थान में पहले से बहस का विषय बन गया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि इस बिल का इस्तेमाल केवल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं होना चाहिए। वहीं, भाजपा सरकार इसे सामाजिक संतुलन और सुरक्षा बनाए रखने का कदम मान रही है।
स्थानीय स्तर पर भी बिल को लेकर विवाद है। जयपुर से करीब दो घंटे दूर स्थित कल्याणी मालपुरा में स्थानीय लोगों ने बताया कि अशांत क्षेत्र घोषित करने के मामले में पहले से कई झगड़े और विवाद सामने आ चुके हैं। मोहल्ला सादात जैसी जगहों पर समुदायिक संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिल सही दिशा में उठाया गया कदम है, लेकिन इसके प्रभाव और प्रभावशीलता केवल तभी स्पष्ट होगी जब इसे सावधानीपूर्वक लागू किया जाए। प्रशासन को चाहिए कि वह किसी भी क्षेत्र में सामुदायिक असंतोष पैदा न होने दे और स्थानीय नागरिकों को इसके नियमों और लाभों के बारे में जागरूक करे।
कुल मिलाकर, राजस्थान का ‘डिस्टर्ब्ड एरिया बिल 2026’ राज्य में सामाजिक संतुलन बनाए रखने और भूमि विवादों पर नियंत्रण के लिए महत्वाकांक्षी प्रयास है। हालांकि, इसके लागू होने पर डर और पलायन जैसी समस्याओं को कितना रोका जा सकेगा, यह समय और प्रशासनिक सावधानी पर निर्भर करेगा।
बिल के तहत, यदि किसी इलाके में एक समुदाय के लोगों का अनुचित जमावड़ा हो या होने की संभावना हो, तो प्रशासन उस इलाके को ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित कर सकता है। ऐसा घोषित किए जाने के बाद किसी भी प्रकार की जमीनों या संपत्ति की बिक्री और खरीद पर नियंत्रण रहेगा। यह कदम गुजरात के समान कानूनों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
कानून तोड़ने पर सख्त सजा का प्रावधान भी किया गया है। इसके अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने पर 3 से 5 साल की जेल की सजा और जुर्माना लगाया जा सकता है। यह प्रावधान प्रशासन को अधिकार देता है कि वह किसी भी अनुचित भूमि हस्तांतरण को तुरंत रोक सके और कानून तोड़ने वालों को दंडित कर सके।
राजनीतिक रूप से यह बिल राजस्थान में पहले से बहस का विषय बन गया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि इस बिल का इस्तेमाल केवल राजनीतिक लाभ के लिए नहीं होना चाहिए। वहीं, भाजपा सरकार इसे सामाजिक संतुलन और सुरक्षा बनाए रखने का कदम मान रही है।
स्थानीय स्तर पर भी बिल को लेकर विवाद है। जयपुर से करीब दो घंटे दूर स्थित कल्याणी मालपुरा में स्थानीय लोगों ने बताया कि अशांत क्षेत्र घोषित करने के मामले में पहले से कई झगड़े और विवाद सामने आ चुके हैं। मोहल्ला सादात जैसी जगहों पर समुदायिक संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि बिल सही दिशा में उठाया गया कदम है, लेकिन इसके प्रभाव और प्रभावशीलता केवल तभी स्पष्ट होगी जब इसे सावधानीपूर्वक लागू किया जाए। प्रशासन को चाहिए कि वह किसी भी क्षेत्र में सामुदायिक असंतोष पैदा न होने दे और स्थानीय नागरिकों को इसके नियमों और लाभों के बारे में जागरूक करे।
कुल मिलाकर, राजस्थान का ‘डिस्टर्ब्ड एरिया बिल 2026’ राज्य में सामाजिक संतुलन बनाए रखने और भूमि विवादों पर नियंत्रण के लिए महत्वाकांक्षी प्रयास है। हालांकि, इसके लागू होने पर डर और पलायन जैसी समस्याओं को कितना रोका जा सकेगा, यह समय और प्रशासनिक सावधानी पर निर्भर करेगा।
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