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लापरवाही से बढ़ी अस्पताल में आग
जांच रिपोर्ट में देरी और अव्यवस्था की पुष्टि हुई
एसएमएस अस्पताल आग हादसे की जांच में सामने आई लापरवाही से छह मरीजों की मौत
25 Feb 2026, 11:11 AM
Rajasthan
-
Jaipur
Reporter :
Mahesh Sharma
Jaipur
जयपुर के एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में कुछ महीने पहले लगी भीषण आग की जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार यह घटना केवल तकनीकी खराबी का परिणाम नहीं थी, बल्कि अस्पताल प्रशासन और स्टाफ की गंभीर लापरवाही ने हादसे को और भयावह बना दिया। इस आगजनी की घटना में छह मरीजों की जान चली गई थी।
जांच में पता चला कि आग लगने की शुरुआती जानकारी अस्पताल प्रशासन को स्टाफ की ओर से नहीं बल्कि मरीजों के परिजनों द्वारा दी गई थी। बताया गया कि देर रात ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में धुआं उठता देख परिजनों ने कई बार कर्मचारियों को सूचना दी, लेकिन समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। इसी देरी के कारण आग धीरे-धीरे फैलती गई और हालात नियंत्रण से बाहर हो गए।
रिपोर्ट के अनुसार सबसे बड़ी लापरवाही उस समय सामने आई जब आग बुझाने के उपकरण रखने वाले स्टोर रूम की चाबी करीब आधे घंटे तक नहीं मिल सकी। धुआं बढ़ता रहा और कर्मचारी चाबी खोजते रहे। समय पर उपकरण नहीं मिलने से आग पर काबू पाने में काफी देरी हुई, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग फैलने के दौरान अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल था। कुछ कर्मचारियों ने मरीजों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की बजाय अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दी। कई लोग जरूरी सामान लेकर बाहर निकलते देखे गए, जबकि वार्ड में भर्ती मरीज मदद का इंतजार करते रहे।
जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी। फॉल सीलिंग और बिजली की वायरिंग में खामियां थीं, जिससे आग तेजी से फैल गई। आपात स्थिति से निपटने के लिए स्टाफ को पर्याप्त प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते आग बुझाने के उपकरण उपलब्ध हो जाते और कर्मचारी समन्वय के साथ काम करते तो नुकसान कम हो सकता था। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि हादसे की गंभीरता बढ़ने के पीछे अव्यवस्था और जिम्मेदारी की कमी प्रमुख कारण रही।
इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने संबंधित कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
एसएमएस अस्पताल में हुई यह घटना सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत व्यवस्थाएं और जवाबदेही तय करना अब आवश्यक माना जा रहा है।
जांच में पता चला कि आग लगने की शुरुआती जानकारी अस्पताल प्रशासन को स्टाफ की ओर से नहीं बल्कि मरीजों के परिजनों द्वारा दी गई थी। बताया गया कि देर रात ट्रॉमा सेंटर के आईसीयू में धुआं उठता देख परिजनों ने कई बार कर्मचारियों को सूचना दी, लेकिन समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। इसी देरी के कारण आग धीरे-धीरे फैलती गई और हालात नियंत्रण से बाहर हो गए।
रिपोर्ट के अनुसार सबसे बड़ी लापरवाही उस समय सामने आई जब आग बुझाने के उपकरण रखने वाले स्टोर रूम की चाबी करीब आधे घंटे तक नहीं मिल सकी। धुआं बढ़ता रहा और कर्मचारी चाबी खोजते रहे। समय पर उपकरण नहीं मिलने से आग पर काबू पाने में काफी देरी हुई, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग फैलने के दौरान अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल था। कुछ कर्मचारियों ने मरीजों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की बजाय अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता दी। कई लोग जरूरी सामान लेकर बाहर निकलते देखे गए, जबकि वार्ड में भर्ती मरीज मदद का इंतजार करते रहे।
जांच में यह भी सामने आया कि अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी। फॉल सीलिंग और बिजली की वायरिंग में खामियां थीं, जिससे आग तेजी से फैल गई। आपात स्थिति से निपटने के लिए स्टाफ को पर्याप्त प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते आग बुझाने के उपकरण उपलब्ध हो जाते और कर्मचारी समन्वय के साथ काम करते तो नुकसान कम हो सकता था। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि हादसे की गंभीरता बढ़ने के पीछे अव्यवस्था और जिम्मेदारी की कमी प्रमुख कारण रही।
इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने संबंधित कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
एसएमएस अस्पताल में हुई यह घटना सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मजबूत व्यवस्थाएं और जवाबदेही तय करना अब आवश्यक माना जा रहा है।
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